देश भर के कैफ़े कॉफ़ी डे
को दो दिनों के लिए बंद कर दिया गया है.हिंदुस्तान का सबसे पहला कॉफ़ी चेन सीसीडी
है.बहुत कम वक़्त में महानगरों से छोटे शहरों तक इसका पहुँच जाना उस नौजवान पीढ़ी की
वजह से ही मुमकिन हो पाया है जिसने आर्थिक उदारीकरण के बाद इस बदलते देश में सपने
देखे हैं और उसको जीने की कोशिश में उन तमाम चीज़ों को अपनाना शुरू किया जिसे वह
अपना स्टेटस सिंबल समझते हैं.पिछले दो दिनों से सीसीडी के फाउंडर वी जी सिद्धार्थ
लापता थे और आज सुबह उनकी लाश मिली है.मीडिया रिपोर्टों में ये बतया जा रहा है कि
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से उनको लगातार परेशान किया जा रहा था.दो दिन पहले
उन्होंने अपने बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स को एक चिट्ठी भी लिखी थी जिसमें उन्होंने इस
बिज़नस को प्रोफिट में नहीं ला पाने की ज़िम्मेदारी को क़बूल किया था.हालाँकि बिज़नस
टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ कॉफ़ी डे एंटरप्राइज के पास 18000 करोड़ से ज़्यादा की
संपत्ति है और सीसीडी को चलने वाली कंपनी कॉफ़ी डे ग्लोबल लिमिटेड के पास 5400
वेंडिंग मशीन के साथ 1600 स्टोर है वहीँ 500 एक्सप्रेस स्टोर है.
आख़िर बिज़नस का ये कौन सा
मॉडल है जो लगातार नाकाम हो रहा है,कंपनियों के बंद होने से हजारों लाखों लोग
बेकार हो रहे हैं.जिंदगियां तबाह हो रही है,फिर ये कौन सा न्यू इंडिया दिखाया जा
रहा है.देश के किसी भी सीसीडी में चले जायें,वहां बैठे लोगों को देख कर आप अंदाज़ा
नहीं लगा सकते हैं कि इस देश में बेरोज़गारी या महंगाई कोई बड़ी समस्या है.सीसीड के
हर टेबल पर घंटों बैठ कर गप्पें मार रहे लोगों के पास पैसा भी होता है और वक़्त
भी.दिल्ली के सबसे व्यस्त मेट्रो स्टेशन या मुंबई के अँधेरी वेस्ट और फोर्ट के
किसी भी सीसीडी में कभी भी जाएँ,आपको सारे टेबल भरे नज़र आएंगे.नयी पीढ़ी के लिए ऐसे
किसी भी कॉफ़ी शॉप में बैठना उसके स्टेटस का मामला है.
इस वक़्त पूरा देश वि जी
सिदार्थ की मौत पर न सिर्फ दुखी है बल्कि हैरान भी है.पुलिस और रेस्क्यू के लोगों
को सिदार्थ की लाश कर्नाटका की एक ()नदी में मिली है.वी जी सिदार्थ बहुत नेक इंसान
के तौर पर जाने जाते थे.एक बार दिल्ली एअरपोर्ट पर अपनी फ्लाइट का वेट करते हुए
पत्रकार डी पी सतीश को उन्होंने बताया था कि जब भी उनकी फ्लाइट डिले होती है वह
lounge में बैठना पसंद नहीं करते हैं बल्कि इकॉनमी क्लास में आम लोगों के साथ रहते
हैं,उसु दिन वक़्त काटने के लिए उन्होंने ख़ुद लाइन में लग कर सीसीडी से दो कॉफ़ी
लिया था,उस स्टोर के स्टाफ को नहीं पता था की वह अपने मालिक को ही कॉफ़ी बेच रहा
है.
वि जी सिदार्थ शायद अपनी
कंपनी के उस स्लोगन को ठीक से समझ नहीं पाए जो उनके हर स्टोर में लिखा रहता है.A lot can happen over coffee.
अगर वह इस छोटी सी लाइन को समझ लेते तो ख़ुद को मरने से बचा सकते थे
ज़िन्दगी में चाहे कितना भी कठोर समय आ जाये,ठहर कर बैठ कर सोचने से ज़िन्दगी को बचाया जा सकता है.


